बिहार, सीतामढ़ी की बेटी सुन्दर कुमारी ने साबित कर दिया कि मुश्किल हालात भी हौसलों को रोक नहीं सकते।
केवल 6 साल की उम्र में मेरठ की ईहा दीक्षित ने साबित कर दिया कि उम्र कभी भी किसी लक्ष्य को रोक नहीं सकती।
स्नेहा नेगी – सपनों को हकीकत में बदलने की मिसाल है! पिता के निधन के बाद भी, उनकी मां ने उन्हें आगे बढ़ने का हौसला दिया।
संकल्प और मेहनत से ही सशक्तिकरण की राह बनती है।
मुंबई की 79 वर्ष की कोकिला पारेख जी ने साबित कर दिया कि सपने देखने की कोई उम्र नहीं होती।
हरियाणा में जन्मी मनु भाकर ने साबित कर दिया कि सपने देखने की कोई उम्र नहीं होती। टेनिस और बॉक्सिंग छोड़कर 14 साल की उम्र में मनु ने शूटिंग को चुना। 16 साल की उम्र में वर्ल्ड कप गोल्ड और फिर पेरिस ओलंपिक में दो ऐतिहासिक कांस्य पदक
केरला में जन्मी जिलुमोल मैरिएट थॉमस ने जन्म से ही हाथ न होने के बावजूद, जिंदगी को मजबूरी नहीं बनने दिया।
सुकन्या समृद्धि योजना बेटियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए शुरू की गई एक सरकारी बचत योजना है। जिससे माता-पिता द्वारा की गई बचत बेटियों की उच्चतम शिक्षा एवं विवाह के लिए लाभकारी साबित होती है।
मधुबनी, बिहार की सुश्री स्वीटी कुमारी ने “Sankalp Creations” की शुरुआत कर न सिर्फ़ हुनर को पहचान दी, बल्कि महिलाओं को आत्मनिर्भरता की राह दिखाई।
भारत की पहली दृष्टिबाधित महिला चार्टर्ड अकाउंटेंट, रजनी गोपालकृष्णन ने साबित किया
कामकाजी महिला छात्रावास योजना (WWH) कामकाजी महिलाओं और छात्राओं के लिए सुरक्षित आवास सुविधा प्रदान करने के उद्देश्य से चलाई जाती है।
सच्ची खुशी तब मिलती है, जब हम दूसरों की ज़िंदगी में रोशनी भरते हैं।” दिल्ली की डॉ. गीतांजलि चोपड़ा ने इसी सोच के साथ 2014 में Wishes and Blessings NGO की शुरुआत की।
भारत की जुडो खिलाड़ी लिंथोई चानाम्बम ने रचा इतिहास!