ग्रामीण भारत की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक सशक्त कदम — दीनदयाल अंत्योदय योजना – राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM)। यह मिशन महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों (SHGs) से जोड़कर उन्हें आर्थिक, सामाजिक और डिजिटल सशक्तिकरण की राह पर अग्रसर कर रहा है।
गुजरात की मुक्ताबेन पंकजकुमार डागली ने मात्र 7 वर्ष की उम्र में मेंजाइटिस की वजह से अपनी आँखों की रोशनी खो दी, लेकिन उन्होनें जीवन देखने का नज़रिया नहीं खोया।
ग्रामीण भारत की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भारत सरकार का एक सशक्त कदम – दीनदयाल अंत्योदय योजना – राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM)।
ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (RSETIs) ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का सशक्त माध्यम हैं।
मदद के लिए तुरंत 14416 पर कॉल करें और अपना मानसिक स्वास्थ्य सुरक्षित रखें।
बोंगारा, असम की ‘कोचपारा अंकुर’ स्वयं सहायता समूह की महिलाएं हाथ करघा weaving के अपने पारंपरिक हुनर के साथ न केवल सुंदर और उत्कृष्ट उत्पाद बना रही हैं, बल्कि अपनी मेहनत और टीम भावना से आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर भी बन चुकी हैं।
आज हमारा लक्ष्य विकसित भारत के निर्माण का है विकसित भारत, जो आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक रूप से सशक्त होगा।
असम स्थित धेमाजी की जागृति फुकन ने क्षेत्र की पारंपरिक सिल्क बुनाई कला को जीवित करने की मुहिम छेड़ी है। उन्होंने वर्ष 2001 में ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बनाने और मूगा और एरी सिल्क के पुनर्निर्माण का काम शुरू किया।
तेलंगाना की शांता सिन्हा, University of Hyderabad की पूर्व प्रोफेसर, जिन्होंने 1991 में MV Foundation की स्थापना अपना जीवन लाखों बच्चों को बाल श्रम से मुक्त कराने के लिए समर्पित कर दिया।
उत्तर प्रदेश की बेटी शिवानी ने सिर्फ पाँच महीने में बीएसएफ में प्रमोशन पाकर इतिहास रच दिया है, जो आमतौर पर 15-18 साल में मिलता है।
सुरक्षित मातृत्व आश्वासन योजना (SUMAN) 2019 में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा शुरू की गई थी। इस योजना का उद्देश्य है
2.08 लाख करोड़ रुपये के केंद्रीय व्यय के साथ, जल जीवन मिशन देश के 15.72 करोड़ ग्रामीण घरों तक स्वच्छ नल जल पहुँचाने का कार्य कर रहा है। यह पहल रोजगार और सशक्तिकरण का बड़ा माध्यम भी बनी है
कशिश मेथवानी सौंदर्य, सेवा और समर्पण की मिसाल बचपन से ही पढ़ाई, खेल और कला में उत्कृष्ट रहीं कशिश ने भरतनाट्यम, तबला, खेल और डिबेट में अपनी पहचान बनाई।